प्रकाशक श्री अजय माकन, Member of Parliament, Rajya Sabha. सीपीसीबी के सरकारी आँकड़ों का स्वतंत्र विश्लेषण। आँकड़ों का संकलन CREA द्वारा। जागरूकता के उसके प्रयासों के लिए हमारा आभार। इस साइट में CREA की कोई भागीदारी नहीं है। संपर्क: ajaymaken@mycleanair.in

रिपोर्ट · 25 August 2026

हवा का हाल श्रेणी के नाम से नहीं, साँस से तय होता है।

आज दिल्ली का औसत AQI 100 है, और मौसम का असर हटाने पर भी इसमें कोई सुधार नहीं दिखता।

148
सबसे ख़राब स्टेशन पर एक्यूआई
Jahangirpuri

आज के कार्ड

गिनतीदो आँकड़ेसबसे ख़राब स्टेशनचार किलोमीटर के दायरे के लोगस्टेशनों का फैलावआख़िरी कार्डचौड़ा कार्ड

आज इंस्टाग्राम, फ़ेसबुक, एक्स और व्हाट्सएप पर यही कार्ड गए। पूरा देखने के लिए किसी एक पर टैप कीजिए।

विश्लेषण की अवधि: 24 अगस्त सुबह 10 बजे से 25 अगस्त सुबह 10 बजे तक
तुलना का आधार: 18 अगस्त से 1 सितंबर 2025

आज की पूरी रिपोर्ट

लगभग बारह पन्ने: आज की हवा का फ़ैसला, हर निगरानी स्टेशन, मौसम बनाम नीति का हिसाब, पूरे साल का मौसम-मुक्त रुझान, और हर आँकड़े के पीछे के अनुबंध।

रोज़ की रिपोर्ट डाउनलोड करेंPDF, 4.0 MB
हिंदी में। अवधि 130 सेकंड।

निष्कर्ष

आज की रिपोर्ट क्या कहती है

औसत किसी के फेफड़ों में नहीं जाता; जाती है वही हवा जो आपके मोहल्ले में है। इस साल के औसत दिन पर दिल्ली के 13 मॉनिटर, यानी क़रीब हर तीसरा मॉनिटर, AQI दो सौ के ऊपर पढ़ते रहे। पिछले साल यह 30 प्रतिशत था।
संकेत एक और: carbon monoxide पिछले साल के इन्हीं दिनों से 69 percent ऊपर है। यह सिर्फ़ संदर्भ है; आज का आकलन भरोसेमंद PM two point five और PM ten पर टिका है।
एक स्टेशन की रीडिंग चार किलोमीटर तक ही भरोसेमंद मानी जाती है, पर दिल्ली के 44 निगरानी क्षेत्रों में से 29 चार किलोमीटर से आगे तक फैले हैं। 26 लाख दिल्लीवासी किसी भी स्टेशन से चार किलोमीटर दूर रहते हैं।
88 दिन। 30 मई से आज तक एक भी दिन ऐसा नहीं, जब मौसम का असर हटाने के बाद भी दिल्ली का अपना PM ten पिछले साल के इन्हीं दिनों के स्तर से नीचे आया हो। इन 88 दिनों में 18 दिन ज़रूर ऐसे रहे जिन पर फ़र्क़ इतना छोटा था कि उसे पक्का नहीं कहा जा सकता; बाक़ी हर दिन वह साफ़ दिखता है। इन 88 दिनों का औसत फ़र्क़ 13 micrograms per cubic metre का है। इस साल अब तक के 237 में से 164 दिन पिछले साल से ऊपर रहे हैं। हाँ, पिछले हफ़्ते में यह फ़र्क़ घटा है, और बीते कुछ दिनों पर तो वह इतना मामूली है कि उन दिनों को अकेले गिनना ठीक नहीं। लेकिन पूरे मौसम पर औसत फ़र्क़ हर जाँच में ऊपर ही निकलता है। बिगड़ाव जस का तस है, बस रफ़्तार धीमी पड़ी है। और आज की असली कहानी यही है।
What it does to health
University of Chicago के Air Quality Life Index के अनुसार, दिल्ली का प्रदूषण औसत उम्र सालों घटाता है।
What we are asking for
सरकार से तीन माँगें। एक, carbon monoxide के स्रोतों, वाहन और खुले दहन, पर तुरंत रोक। दो, देखे गए आँकड़ों में सबसे ख़राब AQI वाले Anand Vihar में स्थानीय स्रोतों पर तुरंत कार्रवाई और स्वास्थ्य-चेतावनी। तीन, CAQM और DPCC की जवाबदेही तय हो, निष्क्रियता पर कार्रवाई हो।
Weather is not the excuse
पिछले साल के मुक़ाबले मिक्सिंग ऊँचाई 459 से 219 मीटर पर आ गई, नीची मिक्सिंग ऊँचाई में प्रदूषण घुटता है; हवा की रफ़्तार 9.7 से 5.3 km/h रह गई, मंद हवा प्रदूषण बिखेरती नहीं। इसीलिए प्रदूषण ज़्यादा टिका और हवा बदतर दिखी। पर मौसम का असर हटाने पर भी पूरे शहर का औसत AQI पिछले साल से 2 अंक ऊपर है; असली प्रदूषण बढ़ा है, दिखने वाले बिगड़ाव में मौसम का बड़ा हाथ है।
Against the WHO standard
आज दर्ज 44 में से 42 स्टेशन PM two point five पर WHO सीमा के पार; PM ten पर तो 43 में से 43। दिल्ली ने आज जो PM two point five साँस में लिया, वह WHO की सुरक्षित सीमा से 2.8 गुना ऊपर था; मौसम का असर हटाने पर भी 2.1 गुना ऊपर ठहरता है।
Worst station
आज सबसे बुरी हवा Wazirpur की रही। वहाँ PM ten 149 micrograms दर्ज हुआ, WHO सीमा से 3.3 गुना ऊपर; मौसम का असर हटाने पर भी 147.3 micrograms, यानी 3.3 गुना ऊपर।

एक सावधानी, जो हम रोज़ छापते हैं

गैसों का दर्ज स्तर दुनिया भर के शोध में सवालों के घेरे में है, इसलिए आकलन का आधार भरोसेमंद PM2.5 और PM10 हैं। पर CO की यह तुलना पिछले साल इन्हीं दिनों से उसी माप-प्रणाली पर है, इसलिए इसकी बढ़त की दिशा भरोसेमंद है; गैस केवल अतिरिक्त संदर्भ है।

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