प्रकाशक श्री अजय माकन, Member of Parliament, Rajya Sabha. सीपीसीबी के सरकारी आँकड़ों का स्वतंत्र विश्लेषण। आँकड़ों का संकलन CREA द्वारा। जागरूकता के उसके प्रयासों के लिए हमारा आभार। इस साइट में CREA की कोई भागीदारी नहीं है। संपर्क: ajaymaken@mycleanair.in

रिपोर्ट · 21 August 2026

मौसम नहीं, टलते फ़ैसलों का हिसाब है यह।

आज दिल्ली का औसत AQI 123 है, और मौसम का असर हटाने पर भी इसमें कोई सुधार नहीं दिखता।

13.6 लाख
दिल्लीवाले ख़राब या उससे बदतर हवा में
ख़राब या उससे बदतर पढ़ने वाले 1 स्टेशनों के चार किलोमीटर के दायरे में
6.5%
शहर की आबादी का हिस्सा
आज यही हवा ले रहे हैं
288
Anand Vihar
Poor

आज के कार्ड

गिनतीदो आँकड़ेसबसे ख़राब स्टेशनचार किलोमीटर के दायरे के लोगस्टेशनों का फैलावआख़िरी कार्डचौड़ा कार्ड

आज इंस्टाग्राम, फ़ेसबुक, एक्स और व्हाट्सएप पर यही कार्ड गए। पूरा देखने के लिए किसी एक पर टैप कीजिए।

विश्लेषण की अवधि: 20 अगस्त सुबह 10 बजे से 21 अगस्त सुबह 10 बजे तक
तुलना का आधार: 14 अगस्त से 28 अगस्त 2025

आज की पूरी रिपोर्ट

लगभग बारह पन्ने: आज की हवा का फ़ैसला, हर निगरानी स्टेशन, मौसम बनाम नीति का हिसाब, पूरे साल का मौसम-मुक्त रुझान, और हर आँकड़े के पीछे के अनुबंध।

रोज़ की रिपोर्ट डाउनलोड करेंPDF, 4.0 MB
हिंदी में। अवधि 141 सेकंड।

निष्कर्ष

आज की रिपोर्ट क्या कहती है

Worst station
Anand Vihar में हालत सबसे ख़राब, AQI 288, श्रेणी ‘ख़राब’, और इसे ऊपर PM two point five ले जा रहा है। मौसम हटाकर देखें तब भी यहाँ की हवा पिछले साल से 12 अंक बदतर है।
AQI 288 के साथ Anand Vihar आज सबसे ख़राब स्टेशन रहा। इसके चार किलोमीटर के दायरे में 14 लाख लोग बसते हैं। गिनती औसत की नहीं, उन सबकी साँस की हो रही है।
दिल्ली के 13 मॉनिटर, यानी क़रीब हर तीसरा, इस साल औसत दिन पर AQI दो सौ के ऊपर दर्ज करते रहे; पिछले साल यह आँकड़ा 31 प्रतिशत था। साँस औसत की नहीं ली जाती, वह अपने-अपने इलाक़े की ली जाती है।
दिल्ली की 6 प्रतिशत आबादी, यानी 14 लाख लोग, आज ऐसे दायरे में रहे जहाँ हवा ‘ख़राब’ या उससे भी बदतर थी। ऐसा 1 स्टेशन आज दर्ज हुआ, और उसके चार किलोमीटर तक की हवा उसी रीडिंग से आँकी जाती है।
जिन 29 स्टेशनों के पास पिछले साल का आँकड़ा है, मौसम हटाने के बाद भी वे सबके सब पिछले साल से बदतर निकले, बीच का स्टेशन 3 AQI अंक ऊपर। कोई कोना छूटा नहीं।
मौसम का हिस्सा निकाल देने के बाद भी दिल्ली का अपना PM ten लगातार 84 दिन से पिछले साल के इन्हीं दिनों से ऊपर टिका है। 30 मई से आज तक पूरे 84 दिन, एक भी दिन पिछले साल के स्तर से नीचे नहीं आया। इनमें 15 दिन ऐसे रहे जिन पर फ़र्क़ इतना छोटा था कि उसे पक्का नहीं कहा जा सकता; बाक़ी हर दिन वह साफ़ दिखा। इन 84 दिनों में यह फ़र्क़ औसतन 13 micrograms per cubic metre रहा। इस साल अब तक के 233 में से 160 दिन पिछले साल से ऊपर बीते हैं। पिछले हफ़्ते फ़र्क़ पहले से छोटा रहा, और आख़िरी कुछ दिनों पर तो इतना छोटा कि अकेले उन दिनों पर पक्का दावा नहीं बनता। पर पूरे मौसम का औसत फ़र्क़ हर जाँच में साफ़ ऊपर है। बिगड़ाव क़ायम है, रफ़्तार धीमी पड़ी है। और यही आज की असली कहानी है।
What it does to health
ऐसी हवा साँस और दिल के मरीज़ों, बच्चों और बुज़ुर्गों की तकलीफ़ बढ़ा सकती है।
What we are asking for
सरकार से तीन माँगें। एक, PM ten के स्रोतों, निर्माण-धूल और सड़क-धूल, पर आज ही सख़्ती। दो, मौसम-मुक्त PM ten में सबसे ख़राब रहे Wazirpur के इलाक़े में स्थानीय स्रोतों पर कार्रवाई और स्वास्थ्य-चेतावनी। तीन, CAQM और DPCC की जवाबदेही तय हो, निष्क्रियता पर कार्रवाई।
Weather is not the excuse
बारिश पिछले साल के 6.1 मिमी से गिरकर इस बार 0.2 मिमी रह गई; बारिश न हो तो प्रदूषण धुलता नहीं, वह टिका रहा और हवा और बदतर दिखी। पर मौसम अलग करने पर भी शहर का औसत AQI पिछले साल से 3 अंक ऊपर बैठता है, यानी असली प्रदूषण बढ़ा है; जो बिगड़ाव आँखों को दिखा, उसमें मौसम का हिस्सा बड़ा है।
Against the WHO standard
PM two point five पर आज दर्ज 42 में से 39 स्टेशन WHO सीमा के पार, और PM ten पर 43 में से 43। दिल्ली ने आज जो PM two point five साँस में लिया, वह WHO की सुरक्षित सीमा से 2.7 गुना ऊपर था; मौसम हटाने पर भी वह 2.2 गुना ऊपर ही ठहरता है।

एक सावधानी, जो हम रोज़ छापते हैं

गैस आँकड़ों, ख़ासकर NO2, में अंतरराष्ट्रीय शोध ने इकाई-संबंधी गड़बड़ियाँ पाई हैं; PM2.5 और PM10 भरोसेमंद हैं, इसलिए आज का आकलन इन्हीं पर केंद्रित है।

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