Worst station
Bawana आज सबसे ऊपर, AQI 240 और श्रेणी ‘ख़राब’, चढ़ाने वाला pollutant PM two point five। मौसम का असर हटा दें, तब भी यहाँ की हवा पिछले साल से 3 अंक बदतर।
Against the WHO standard
PM two point five पर 42 में से 38 स्टेशन WHO सीमा के पार, और PM ten पर तो 42 में से 42। मौसम का हिस्सा हटा देने पर भी दिल्ली का अपना PM two point five WHO की सुरक्षित सीमा का 2.1 गुना बैठता है।
चिंता की असली वजह: बीते साल के इन्हीं दिनों से दिल्ली का AQI 13 अंक ऊपर चढ़ चुका है। हवा बिगड़ी है, यही सच है।
आज की सबसे बड़ी बात यही है: मौसम का पूरा हिस्सा निकाल देने के बाद भी दिल्ली का अपना PM ten लगातार 80 दिन से पिछले साल के इन्हीं दिनों से ऊपर टिका है। मई से अब तक जिन दिनों के आँकड़े हैं, उनमें एक दिन भी पिछले साल के स्तर से नीचे नहीं आया। 1 दिन का आँकड़ा नहीं है। इन दिनों में यह फ़र्क़ औसतन 14 माइक्रोग्राम रहा। इस साल के 229 में से 156 दिन पिछले साल से ऊपर रहे। फ़र्क़ आज भी क़ायम है, हालाँकि पिछले हफ़्ते यह घटा है। बिगड़ाव जारी है, रफ़्तार भर धीमी पड़ी है। असली कहानी यही है।
औसत एक आँकड़ा है, पूरी तस्वीर नहीं। पिछले साल की इन्हीं तारीख़ों से तुलना कीजिए: साल का सबसे साफ़ चौथाई 100 से 118 पर, बीच का दिन 152 से 166 पर, और सबसे ख़राब दसवाँ हिस्सा 301 से 303 पर। जो दिन सबसे साफ़ गिने जाते थे, वे भी अब मैले हैं, और जिन दिनों साँस लेना सबसे कठिन है, वे जहाँ थे वहीं खड़े हैं। दिन गिनती में बढ़े, हवा उतनी ही ख़राब।
हर आदमी अपने इलाक़े की हवा पीता है, शहर का औसत नहीं। इस साल के औसत दिन पर दिल्ली के अपने 13 मॉनिटर, यानी क़रीब एक तिहाई शहर, AQI दो सौ के ऊपर पढ़ते रहे; पिछले साल यह 31 प्रतिशत था।
What it does to health
बच्चों, बुज़ुर्गों और साँस व दिल के मरीज़ों को इस स्तर पर तकलीफ़ हो सकती है।
Weather is not the excuse
बारिश पिछले साल के 7 मिमी से गिरकर 1.3 मिमी रह गई, और जो बरसती नहीं वह धोती भी नहीं; मिक्सिंग ऊँचाई 447.7 से गिरकर 289.8 मीटर, प्रदूषण को फैलने की जगह कम मिली और वह टिका रहा, इसलिए हवा और बदतर दिखी। पर मौसम का असर हटाने पर भी शहर के औसत AQI में पिछले साल से 2 अंक की बढ़त है, असली प्रदूषण बढ़ा है; दिखने वाले बिगड़ाव में मौसम का हाथ बड़ा है।
एक स्टेशन की रीडिंग चार किलोमीटर तक की हवा मानी जाती है। उस हिसाब से आज जिन 1 स्टेशनों पर हवा 'ख़राब' या उससे भी बदतर रही, उनके दायरे में 3 लाख लोग आते हैं, दिल्ली की 1 प्रतिशत आबादी।