प्रकाशक श्री अजय माकन, Member of Parliament, Rajya Sabha. सीपीसीबी के सरकारी आँकड़ों का स्वतंत्र विश्लेषण। आँकड़ों का संकलन CREA द्वारा। जागरूकता के उसके प्रयासों के लिए हमारा आभार। इस साइट में CREA की कोई भागीदारी नहीं है। संपर्क: ajaymaken@mycleanair.in

रिपोर्ट · 08 August 2026

दोष मौसम का नहीं। 70 दिन से दिल्ली की हवा पिछले साल से बदतर, मौसम का हिस्सा निकालने के बाद भी।

दिल्ली का औसत AQI आज 65 दिखता है; मौसम का हिस्सा निकालिए तो 94, यानी दिखने से कहीं बदतर।

107
सबसे ख़राब स्टेशन पर एक्यूआई
Anand Vihar, मध्यम
विश्लेषण की अवधि: 7 अगस्त सुबह 10 बजे से 8 अगस्त सुबह 10 बजे तक
तुलना का आधार: 1 अगस्त से 15 अगस्त 2025

आज की पूरी रिपोर्ट

लगभग बारह पन्ने: आज की हवा का फ़ैसला, हर निगरानी स्टेशन, मौसम बनाम नीति का हिसाब, पूरे साल का मौसम-मुक्त रुझान, और हर आँकड़े के पीछे के अनुबंध।

रोज़ की रिपोर्ट डाउनलोड करेंPDF, 1.9 MB
हिंदी में। अवधि 127 सेकंड।

सबूत

रोज़ का residual: इस साल का स्तर घटा पिछले साल का

■ लाल रेखा: मौसम का असर हटाने के बाद का residual। शून्य रेखा से ऊपर यानी प्रदूषण पिछले साल से ज़्यादा था; शून्य रेखा से नीचे यानी कम था।
+0+10+20+30 पिछले साल के बराबर +12.6 30 May04 Jul08 Aug µg/m³
हर बिंदु एक residual है: उस दिन का PM10 स्तर, घटा पिछले साल की इसी अवधि का स्तर, मौसम का असर हटाने के बाद। छायांकित पट्टी हर दिन की अनिश्चितता दिखाती है। शून्य रेखा से ऊपर का मतलब है कि दिल्ली की हवा सचमुच पिछले साल से बदतर थी, सिर्फ़ हवा की बदक़िस्मती नहीं; रेखा से नीचे का मतलब है सचमुच साफ़।

निष्कर्ष

आज की रिपोर्ट क्या कहती है

What de-weathering means
de-weathering, यानी ‘मौसम का असर हटाना’, यह है। हवा, बारिश और तापमान का हिस्सा हम गणित से आँकड़ों से अलग कर देते हैं। तेज़ हवा और बारिश प्रदूषण को बहा या धो ले जाती है, शांत मौसम उसे जमा रखता है, इसलिए एक दिन की हवा साफ़ या गंदी सिर्फ़ मौसम के कारण दिख सकती है। यह हिस्सा अलग करने पर जो बचे, वही शहर का अपना, सचमुच का प्रदूषण है, और वही 70 दिन से लगातार ऊपर है।
ज़मीनी हवा बिगड़ी है: मौसम का हिस्सा हटाने पर दिल्ली का AQI पिछले साल से 12 अंक ऊपर है। इसमें बड़ा हाथ PM ten, sulphur dioxide और PM two point five का है। सात में से 5 प्रदूषकों की हालत जस की तस या बदतर है। यह नीति की नाकामी है, मौसम की मेहर नहीं।
Weather is not the excuse
इस बार बारिश 3.1 मिमी से बढ़कर 16.7 मिमी हो गई, और बारिश प्रदूषण को धो देती है; इसीलिए प्रदूषण बिखरा और हवा साफ़ दिखी। पर मौसम का असर हटाते ही पूरे शहर के औसत में AQI पिछले साल से 12 अंक ऊपर है, असली प्रदूषण बढ़ा है; यह दिखावा नीति का नहीं, मौसम का है।
जिन 22 स्टेशनों का पिछले साल का आँकड़ा है, मौसम हटाने पर वे सभी पिछले साल से बदतर हैं; बीच का स्टेशन 13 AQI अंक ऊपर। कोई इलाक़ा बचा नहीं, बढ़त पूरे शहर में है।
37 में से 21 स्टेशन पर आज प्रमुख प्रदूषक carbon monoxide है, शहर की हवा को सबसे ज़्यादा यही बिगाड़ रहा है।
साथ में यह भी देखिए: carbon monoxide पिछले साल इन्हीं दिनों से 29 percent ऊपर है। यह सिर्फ़ संदर्भ है; आकलन का आधार तो भरोसेमंद PM two point five और PM ten ही हैं।
What it does to health
University of Chicago का Air Quality Life Index बताता है, दिल्ली का प्रदूषण औसत आयु सालों घटाता है।
Against the WHO standard
PM two point five में 36 में से 31 स्टेशन WHO सीमा के पार, PM ten में 36 में से 13 स्टेशन। और मौसम का असर हटाने पर भी दिल्ली का अपना PM two point five WHO की सुरक्षित सीमा से 2.3 गुना ऊपर है।
Worst station
शहर में सबसे बुरी जगह Anand Vihar। मौसम हटाने पर वहाँ AQI 107 और PM ten 109.6 micrograms, यानी WHO सीमा से 2.4 गुना ऊपर।

एक सावधानी, जो हम रोज़ छापते हैं

गैसों का दर्ज स्तर दुनिया भर के शोध में सवालों के घेरे में है, इसलिए आकलन का आधार भरोसेमंद PM2.5 और PM10 हैं। पर CO की यह तुलना पिछले साल इन्हीं दिनों से उसी माप-प्रणाली पर है, इसलिए इसकी बढ़त की दिशा भरोसेमंद है; गैस केवल अतिरिक्त संदर्भ है।

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