प्रकाशक श्री अजय माकन, Member of Parliament, Rajya Sabha. सीपीसीबी के सरकारी आँकड़ों का स्वतंत्र विश्लेषण। आँकड़ों का संकलन CREA द्वारा। जागरूकता के उसके प्रयासों के लिए हमारा आभार। इस साइट में CREA की कोई भागीदारी नहीं है। संपर्क: ajaymaken@mycleanair.in

रिपोर्ट · 29 July 2026

मौसम हटाने पर भी दिल्ली की हवा लगातार 60 दिन से पिछले साल से बदतर है। एक दिन भी राहत नहीं। यह टिकाऊ प्रदूषण है, मौसम नहीं।

देखने में आज दिल्ली का औसत AQI 79 ठहरता है, मगर मौसम का असर हटाते ही यह 81 पर जा बैठता है, यानी असली हालत इससे भी ख़राब है।

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सबसे ख़राब स्टेशन पर एक्यूआई
Anand Vihar, मध्यम
विश्लेषण की अवधि: 28 जुलाई सुबह 10 बजे से 29 जुलाई सुबह 10 बजे तक
तुलना का आधार: 22 जुलाई से 5 अगस्त 2025

आज की पूरी रिपोर्ट

लगभग बारह पन्ने: आज की हवा का फ़ैसला, हर निगरानी स्टेशन, मौसम बनाम नीति का हिसाब, पूरे साल का मौसम-मुक्त रुझान, और हर आँकड़े के पीछे के अनुबंध।

रोज़ की रिपोर्ट डाउनलोड करेंPDF, 0.6 MB
हिंदी में। अवधि 110 सेकंड।

सबूत

रोज़ का residual: इस साल का स्तर घटा पिछले साल का

■ लाल रेखा: मौसम का असर हटाने के बाद का residual। शून्य रेखा से ऊपर यानी प्रदूषण पिछले साल से ज़्यादा था; शून्य रेखा से नीचे यानी कम था।
+0+10+20+30 पिछले साल के बराबर +4.4 30 May29 Jun29 Jul µg/m³
हर बिंदु एक residual है: उस दिन का PM10 स्तर, घटा पिछले साल की इसी अवधि का स्तर, मौसम का असर हटाने के बाद। छायांकित पट्टी हर दिन की अनिश्चितता दिखाती है। शून्य रेखा से ऊपर का मतलब है कि दिल्ली की हवा सचमुच पिछले साल से बदतर थी, सिर्फ़ हवा की बदक़िस्मती नहीं; रेखा से नीचे का मतलब है सचमुच साफ़।

निष्कर्ष

आज की रिपोर्ट क्या कहती है

मौसम का हिस्सा गणित से अलग कर देने पर भी दिल्ली के सभी 29 मिलान स्टेशन पिछले साल से बदतर निकलते हैं, औसतन 5 AQI अंक ऊपर। यह चढ़ाव पूरे शहर में फैला है, कहीं कोई राहत नहीं।
What de-weathering means
‘मौसम का असर हटाना’, यानी de-weathering, का मतलब यह है कि हम आँकड़ों में से हवा, बारिश और तापमान का हाथ गणित के ज़रिए बाहर कर देते हैं। बारिश और तेज़ हवा प्रदूषण को धो या बहा ले जाती है, जबकि ठहरा हुआ मौसम उसे वहीं जमा रखता है, इसलिए किसी एक दिन की हवा भली या बुरी केवल मौसम के कारण भी दिख सकती है। मौसम का यह हाथ हट जाने के बाद जो शेष रहता है, वही शहर का अपना, असली प्रदूषण है, और वही 60 दिन से लगातार ऊपर टिका है।
Against the WHO standard
दिल्ली के 41 में से 39 स्टेशन PM two point five की WHO सीमा को लाँघ चुके हैं, और 40 में से 37 स्टेशन PM ten की WHO सीमा से ऊपर हैं।
पूरे 16 स्टेशन पर AQI पिछले साल से चढ़ा है, और Alipur में तो यह 39 अंक ऊपर जा पहुँचा। प्रदूषण का बोझ हर जगह बराबर नहीं है।
एक और इशारा, carbon monoxide का स्तर पिछले साल इन्हीं दिनों के मुक़ाबले 51 percent ऊपर है। यह महज़ अतिरिक्त संदर्भ है, आज के आकलन की बुनियाद तो भरोसेमंद PM two point five और PM ten ही हैं।
What it does to health
University of Chicago के Air Quality Life Index की गणना कहती है कि दिल्ली का यह प्रदूषण हर इंसान की जीवन-अवधि में से कई साल काट देता है।
What we are asking for
सरकार से तीन माँगें। पहली, PM ten के स्रोतों यानी निर्माण-धूल और सड़क-धूल, और PM two point five के स्रोतों यानी उद्योग, वाहन और बायोमास-दहन, दोनों पर बिना देर किए सख़्ती हो। दूसरी, मौसम-मुक्त PM ten में सबसे ख़राब Anand Vihar का इलाक़ा, जहाँ PM ten 94.0 micrograms यानी WHO सीमा से 2.1 गुना ऊपर है, और मौसम-मुक्त हवा पिछले साल से 11 अंक और बिगड़ चुकी है, वहाँ स्थानीय स्रोतों पर फ़ौरन कार्रवाई और स्वास्थ्य-चेतावनी हो। तीसरी, CAQM और DPCC की जवाबदेही तय हो, निष्क्रियता पर कार्रवाई हो।
Worst station
सबसे बुरी हालत Anand Vihar की है, जहाँ मौसम का असर हटाते ही AQI 94 पर पहुँचता है, और PM ten 94.0 micrograms, यानी WHO सीमा से 2.1 गुना ऊपर।

एक सावधानी, जो हम रोज़ छापते हैं

गैसों का दर्ज स्तर दुनिया भर के शोध में सवालों के घेरे में है — इसलिए आकलन का आधार भरोसेमंद PM2.5 और PM10 हैं। पर CO की यह तुलना पिछले साल इन्हीं दिनों से उसी माप-प्रणाली पर है, इसलिए इसकी बढ़त की दिशा भरोसेमंद है; गैस केवल अतिरिक्त संदर्भ है।

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