प्रकाशक श्री अजय माकन, Member of Parliament, Rajya Sabha. सीपीसीबी के सरकारी आँकड़ों का स्वतंत्र विश्लेषण। आँकड़ों का संकलन CREA द्वारा। जागरूकता के उसके प्रयासों के लिए हमारा आभार। इस साइट में CREA की कोई भागीदारी नहीं है। संपर्क: ajaymaken@mycleanair.in

रिपोर्ट · 26 July 2026

यह चढ़ाई मौसम की चाल नहीं, नीति की नाकामी है।

आज दिल्ली का औसत PM2.5 33 और PM10 84 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ है। 44 में से 39 स्टेशन पर PM2.5 विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा को लाँघ चुका है।

34 / 34
स्टेशन बदतर
पिछले साल की इसी अवधि से
+10
औसत स्टेशन, एक्यूआई अंक
पिछले साल से ऊपर, मौसम का असर हटाकर
+11.7
सबसे बुरा दसवाँ हिस्सा, एक्यूआई अंक
सबसे अधिक प्रभावित स्टेशन
193
सबसे ख़राब स्टेशन पर एक्यूआई
Wazirpur, मध्यम
विश्लेषण की अवधि: 25 जुलाई सुबह 10 बजे से 26 जुलाई सुबह 10 बजे तक
तुलना का आधार: 19 जुलाई से 2 अगस्त 2025

आज की पूरी रिपोर्ट

लगभग बारह पन्ने: आज की हवा का फ़ैसला, हर निगरानी स्टेशन, मौसम बनाम नीति का हिसाब, पूरे साल का मौसम-मुक्त रुझान, और हर आँकड़े के पीछे के अनुबंध।

रोज़ की रिपोर्ट डाउनलोड करेंPDF, 0.4 MB
हिंदी में। अवधि 118 सेकंड।

निष्कर्ष

आज की रिपोर्ट क्या कहती है

Pollutant detail
मौसम का हिस्सा गणित से निकाल दें, तब भी PM ten पिछले साल से 14 percent ऊपर ठहरता है, और यह बढ़त नीति की विफलता है, मौसम की नहीं।
Pollutant detail
मौसम का हिस्सा अलग कर दें, तब भी PM two point five पिछले साल से 13 percent ऊपर बना रहता है, और यह बढ़त नीति की विफलता है, मौसम की नहीं।
What de-weathering means
‘मौसम का असर हटाना’, यानी de-weathering, का मतलब यह है कि आँकड़ों में से हवा, बारिश और तापमान का जो हाथ होता है, उसे हम गणित से छाँट कर बाहर कर देते हैं। बारिश और तेज़ हवा प्रदूषण को धो या बहा ले जाती है, जबकि ठहरा हुआ मौसम उसे वहीं जमा रखता है, इसीलिए किसी एक दिन की हवा केवल मौसम के कारण भली या बुरी दिख सकती है। यह मौसमी हाथ हटा देने पर जो शेष रहता है, वही शहर का अपना, सच्चा प्रदूषण है, और वही 58 दिन से लगातार ऊपर टिका है।
आज की सबसे बड़ी बात यही है कि मौसम का असर पूरी तरह हटा देने के बावजूद दिल्ली का अपना PM ten लगातार 58 दिन से पिछले साल के ठीक इन्हीं दिनों की तुलना में ऊपर बना हुआ है। पूरे 58 दिन, मई से लेकर आज तक, एक भी दिन यह पिछले साल के स्तर से नीचे नहीं आया। मौसम का हिस्सा निकाल देने पर भी यह अंतर क़ायम रहता है। यह लगातार चलता, टिकाऊ बिगड़ाव है, और यही आज की सच्ची कहानी है।
Against the WHO standard
दिल्ली के 44 में से 39 स्टेशन PM two point five की WHO सीमा को पार कर चुके हैं, और 42 में से 39 स्टेशन PM ten की WHO सीमा से ऊपर हैं।
µg/m³ के हिसाब से सबसे बुरी हालत Wazirpur की है, जहाँ PM two point five 88 micrograms यानी WHO से 6 गुना ऊपर, और PM ten 236 micrograms यानी WHO से 5 गुना ऊपर है।
What it does to health
University of Chicago के Air Quality Life Index के मुताबिक़, दिल्ली का यह प्रदूषण हर बाशिंदे की औसत उम्र में से कई साल छीन लेता है।
What we are asking for
सरकार से तीन माँगें। पहली, PM ten के स्रोतों यानी निर्माण-धूल और सड़क-धूल, और PM two point five के स्रोतों यानी उद्योग, वाहन और बायोमास-दहन, दोनों पर बिना देर किए सख़्ती हो। दूसरी, मौसम-मुक्त PM ten में सबसे ख़राब Wazirpur का इलाक़ा, जहाँ PM ten 162.2 micrograms यानी WHO सीमा से 3.6 गुना ऊपर है, और मौसम-मुक्त हवा पिछले साल से 14 अंक बिगड़ी है, वहाँ स्थानीय स्रोतों पर फ़ौरन कार्रवाई और स्वास्थ्य-चेतावनी हो। तीसरी, ‘ख़राब’ से ऊपर के दिनों में जन-स्वास्थ्य protocol लागू किया जाए।

एक सावधानी, जो हम रोज़ छापते हैं

आज गैसों के आँकड़े बहुत कम स्टेशनों से आए हैं। NO2 10, SO2 9, CO 11 स्टेशन पर, जबकि PM लगभग 44 स्टेशन पर दर्ज हुआ। इतने कम आँकड़ों से कोई भरोसेमंद निष्कर्ष नहीं निकलता। इसलिए आज का पूरा आकलन सिर्फ़ PM2.5 और PM10 पर है, माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में। आज कोई संयुक्त AQI अंक नहीं दिया जा रहा है।

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